Wednesday, July 22, 2026

जनादेश से निकले

 सुनो बच्चों!!

बेशक तुम्हारा आग्रह जायज़ है

और गुस्सा भी, 

इस नक्कारी व्यवस्था पर।

नहीं है गलत 

विरोध का रास्ता भी,

मुर्दा बन जीने से 

जुबां खोल

मरना ही सही

पर सोचो ठहर के!

एक दिन ...

जनादेश से निकला जो दैत्य था

वह क्या 

भूख हड़तालों से जाएगा?

जिसे हमने बैठाया

सिंहासन पर..

वो लाठियां खाने से 

हट जाएगा?

जिसे हमने किया पैदा,

उसे हमे ही 

मिटाना होगा 

जनादेश से 

आये दैत्य को 

जनादेश से भगाना होगा..

जी जाएंगे

ये रक्तबीज फिर से..

जो एक डग भी 

फिसला तुम्हारा अहिंसा से

ये नई साजिशें रचेंगे

बांटेंगे तुम्हें फांक फांक

फूट से तुम्हारी,

सत्ता का रास्ता बनाएंगे

दे कर अफीम

धर्म की!

शरीर तुम्हारे 

नोच खाएंगे,

लोकतंत्र में

सत्ता का मद

बैलेट से उतारा जाता है..

राजनीति के दम्भ को

चुनाव में झाड़ा जाता है,

है स्वांग चहुँ ओर

तुम इनसे बच कर निकलना

तुम्हें कीड़ा मकौड़ा 

समझने वाली

राजनीति को

चुनाव में राजनीति सिखाना

भूल जाना,

हिन्दू-मुसलमान

अगड़ा या पिछड़ा

रखना याद तिरंगा 

और ये कि 

बस भारतीय हो तुम!!!

है लोकतंत्र में 

आस्था इस देश की

इसी मार्ग से

अहंकार को धूल चटाना,

जनादेश से निकले दैत्य को

जनादेश से भगाना...


22.07.26

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