बरसाओ लट्ठ,
उतार दो सिर कांधे से
ये जवानी है कायरों,
डरती नहीं मर जाने से
जुल्म की इंतिहा भी
ओ कातिल
रोक न सकेगी
इंकलाब आने से!!!
है ये तेरे तौर तरीको की नुमाइश
तो है हमारे भी हौसलों की आजमाइश
ज़ालिम जीतेगा या सब्र
ये लिखेगा वक़्त
हमने बनाया अब
खूं को अपने
रोशनाई है...
20.07.26
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