Thursday, July 23, 2026

सत्ता की अहंकार

 जब सत्ता रखती 

रखैल हो,

लोकतंत्र के स्तंभों को 

जब महफिलों में 

सत्ता की,

करती मुजरा मीडिया हो,

जब माय लार्ड !

बनाते जाम हो

ऐसी किस्मत पर

सत्ता को 

क्यों न अहंकार हो?


इस लोकतंत्र में जहाँ

तंत्र प्रतिगामी हो,

जनतंत्र में घुटती

लोगो की सांस हो,

झूठ का गुंडाराज हो

फिर भी मौन सर्वत्र हो

ऐसी राजशाही पर

सत्ता को 

क्यों न अहंकार हो?


जब चोर दरवाजे से

बिकी विपक्ष की

आवाज हो,

जब भूल संविधान 

नौकरशाही ने,

सत्ता को ही

माना भगवान हो

जब शिक्षक का

ज़मीर गिरवी,

कलम मोहताज हो,

ऐसी गुलामो की फौज पर

सत्ता को

क्यों न अहंकार हो?


जब नैनिहाल 

देश के,

पिटते सड़को पर हों

हक़ की बात करने वाले 

सड़ते जेल में हों

जब माफिया के हाथों में

कमान संसाधनों की हो

जब देशभक्ति के,

बदल दिए गए मायने हों

डरी, सहमी कौम हो,

ऐसे गुंडाराज पर

सत्ता को 

क्यों न अहंकार हो?


23.07.26

Wednesday, July 22, 2026

बरसाओ लट्ठ

 बरसाओ लट्ठ, 

उतार दो सिर कांधे से

ये जवानी है कायरों,

डरती नहीं मर जाने से

जुल्म की इंतिहा भी

ओ कातिल

रोक न सकेगी 

इंकलाब आने से!!!

है ये तेरे तौर तरीको की नुमाइश

तो है हमारे भी हौसलों की आजमाइश

ज़ालिम जीतेगा या सब्र

ये लिखेगा वक़्त

हमने बनाया अब 

खूं को अपने

रोशनाई है...


20.07.26

जनादेश से निकले

 सुनो बच्चों!!

बेशक तुम्हारा आग्रह जायज़ है

और गुस्सा भी, 

इस नक्कारी व्यवस्था पर।

नहीं है गलत 

विरोध का रास्ता भी,

मुर्दा बन जीने से 

जुबां खोल

मरना ही सही

पर सोचो ठहर के!

एक दिन ...

जनादेश से निकला जो दैत्य था

वह क्या 

भूख हड़तालों से जाएगा?

जिसे हमने बैठाया

सिंहासन पर..

वो लाठियां खाने से 

हट जाएगा?

जिसे हमने किया पैदा,

उसे हमे ही 

मिटाना होगा 

जनादेश से 

आये दैत्य को 

जनादेश से भगाना होगा..

जी जाएंगे

ये रक्तबीज फिर से..

जो एक डग भी 

फिसला तुम्हारा अहिंसा से

ये नई साजिशें रचेंगे

बांटेंगे तुम्हें फांक फांक

फूट से तुम्हारी,

सत्ता का रास्ता बनाएंगे

दे कर अफीम

धर्म की!

शरीर तुम्हारे 

नोच खाएंगे,

लोकतंत्र में

सत्ता का मद

बैलेट से उतारा जाता है..

राजनीति के दम्भ को

चुनाव में झाड़ा जाता है,

है स्वांग चहुँ ओर

तुम इनसे बच कर निकलना

तुम्हें कीड़ा मकौड़ा 

समझने वाली

राजनीति को

चुनाव में राजनीति सिखाना

भूल जाना,

हिन्दू-मुसलमान

अगड़ा या पिछड़ा

रखना याद तिरंगा 

और ये कि 

बस भारतीय हो तुम!!!

है लोकतंत्र में 

आस्था इस देश की

इसी मार्ग से

अहंकार को धूल चटाना,

जनादेश से निकले दैत्य को

जनादेश से भगाना...


22.07.26

Tuesday, July 14, 2026

 नही होता घटित अकस्मात,

जीवन में , कुछ भी

न ही रोकता प्रतिरोध,

न बदलता परिणाम, कुछ भी

बहती नदिया सागर तक

काट पहाड़ जैसा, कुछ भी

ठहरता नही इस धरा पर 

जड़ चेतन, कुछ भी

बीतते, सुंदर-असुंदर सब

नहीं बांधता उन्हें, कुछ भी

है दृष्टि, दिशाओं का भेद

अतिरिक्त नहीं, कुछ भी

लिखे नियति विपरीत दिशा से

पढ़ते हम उलट, कुछ भी

अकस्मात होता हमारे लिए

विधि हेतु नहीं ऐसा, कुछ भी

मुक्ति में छिपी मुक्ति

न जाता चिता तक, कुछ भी


02.07.26

 एक एक सांस लड़

मृत्यु से जीता हूँ,

क्या बेंधेंगे विष बाण मुझे?

मैं मृत्यु शय्या से उठा हूँ...


हूँ तनिक नहीं विचलित मैं

जीवन पथ की कठनाइयों से,

क्या विचलित करेंगे ये मुझे?

मैं संघर्षों से प्रेरणा लेता हूँ..


दौड़ता लहु धमनियों में

करता उद्घोष ये!!

समर यह न थमेगा,

मैं योद्धा बन कर आया हूँ...


12.07.26