कहते है कि संघर्ष व्यक्तित्व को परिष्कृत करता है, प्रत्येक व्यक्ति का संघर्ष अलग अलग तरह का हो सकता है।
आजकल नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी को देख कर ऐसा लग रहा कि वे अपने हिस्से का संघर्ष कर चुके है। उनके वक्तव्यों, मुद्दों और छात्रों के साथ संवाद में दिख रहा कि वे जनता की नब्ज समझ चुके है। जिस तरह से पहली बार वो संघ और भाजपा की रणनीति पर सधे हुए हमले कर रहे और लोगो को यह समझाने में सफल हो रहे है कि कैसे ये व्यवस्था अब तक कुछ भी परिणाम नहीं दे सकी है मात्र मीडिया मैनेजमेंट और संस्थानों पर नियंत्रण के बल पर सत्ता पर पकड़ बनाई हुई है। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष सरकार के लिए खुद ही एक लक्ष्मण रेखा खींच देता है। भले देर से ही सही विपक्ष की मजबूत आवाज सुनाई दे रही तो यह शुभ संकेत है। राहुल गांधी की इस परिपक्वता और प्रयासों का स्वागत है...
09.08.26
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