Sunday, January 2, 2022

वहशीपन

 तूने नोचे उसके तन से कपड़े जहां 

जिंदा ही जला दिया, 

वहशीपन ने तेरे

 किसी औरत के खून को ही शर्मशार किया ,

खुदा की खुदाई तो देखो ,

मौत ने तेरा वही इंतज़ार किया।

राणा का लहू

 शिराओं में बहता तेरे 

राणा का लहू है

मिट के भी जो न मिट सका वो तू है

धरा से व्योम तक

जिनके कदमों के निशान

उनकी संतति तू है

आज फिर एक युद्ध जीवन का

जो इसे सकता है जीत

वो मात्र तू है।

Saturday, January 1, 2022

एक कहानी

 तेरी अनकही बातो में

एक कहानी सी है

तेरे साथ से ये फ़िज़ा सुहानी सी है।

तेरी सांसो की गर्माहट से 

ज़िन्दगी में इक रवानी सी है

उम्र जो बाटी हमने आधी आधी

उसमे अभी वही जवानी सी है

तेरे वज़ूद की हकीकत में

वही कशिश पुरानी सी है।

नव वर्ष मंगलमय हो

 लय हुआ जो आज 

धरा के आवर्त से

कल उदित होगा फिर 

प्रकृति की प्रवर्त से

नई सुबह नई आस लाये

उदयाचल फिर मंगलगीत गाए

घाव जो गहरे, 

अश्रु बन पलकों पे ठहरे

बिछड़े जो बीच सफ़र में

फिर मिले बन ज़िंदगी के नए चेहरे

स्याह राते खिली सुबह का आलिंगन करे

नव प्रभात,नव वर्ष हर आंगन में

नव ऊर्जा ,नव प्राण भरे।

नव वर्ष मंगलमय हो।

Friday, December 31, 2021

चुन चुन कर प्रहार कर

 हाथों में शस्त्र आभूषण नही

शक्ति है तेरी बंधन नहीं,

धर्म तेरा वही जो शस्त्रो का है

कर्म तेरा वही जो शस्त्रों का है,

 दंड ही नियति उपद्रव की ,

संहार ही परिणिति पाप की,

गांडीव उठा अर्जुन! इच्छा यही प्रभु की

काल बैठा जिनके मस्तक पर,

वो मदान्ध ही मारते पत्थर सोये सिंहों को 

दुःसाहस देता न्योता दंड को ,

अति का अंत ही शोभित न्याय को,

अन्यायी का दमन ही पोषण जीवन को,

 हो संशयहीन अब तू संहार कर, 

गांडीव उठा चुन चुन कर प्रहार कर, 

चुन चुन कर प्रहार कर।