तूने नोचे उसके तन से कपड़े जहां
जिंदा ही जला दिया,
वहशीपन ने तेरे
किसी औरत के खून को ही शर्मशार किया ,
खुदा की खुदाई तो देखो ,
मौत ने तेरा वही इंतज़ार किया।
तूने नोचे उसके तन से कपड़े जहां
जिंदा ही जला दिया,
वहशीपन ने तेरे
किसी औरत के खून को ही शर्मशार किया ,
खुदा की खुदाई तो देखो ,
मौत ने तेरा वही इंतज़ार किया।
शिराओं में बहता तेरे
राणा का लहू है
मिट के भी जो न मिट सका वो तू है
धरा से व्योम तक
जिनके कदमों के निशान
उनकी संतति तू है
आज फिर एक युद्ध जीवन का
जो इसे सकता है जीत
वो मात्र तू है।
तेरी अनकही बातो में
एक कहानी सी है
तेरे साथ से ये फ़िज़ा सुहानी सी है।
तेरी सांसो की गर्माहट से
ज़िन्दगी में इक रवानी सी है
उम्र जो बाटी हमने आधी आधी
उसमे अभी वही जवानी सी है
तेरे वज़ूद की हकीकत में
वही कशिश पुरानी सी है।
लय हुआ जो आज
धरा के आवर्त से
कल उदित होगा फिर
प्रकृति की प्रवर्त से
नई सुबह नई आस लाये
उदयाचल फिर मंगलगीत गाए
घाव जो गहरे,
अश्रु बन पलकों पे ठहरे
बिछड़े जो बीच सफ़र में
फिर मिले बन ज़िंदगी के नए चेहरे
स्याह राते खिली सुबह का आलिंगन करे
नव प्रभात,नव वर्ष हर आंगन में
नव ऊर्जा ,नव प्राण भरे।
नव वर्ष मंगलमय हो।
हाथों में शस्त्र आभूषण नही
शक्ति है तेरी बंधन नहीं,
धर्म तेरा वही जो शस्त्रो का है
कर्म तेरा वही जो शस्त्रों का है,
दंड ही नियति उपद्रव की ,
संहार ही परिणिति पाप की,
गांडीव उठा अर्जुन! इच्छा यही प्रभु की
काल बैठा जिनके मस्तक पर,
वो मदान्ध ही मारते पत्थर सोये सिंहों को
दुःसाहस देता न्योता दंड को ,
अति का अंत ही शोभित न्याय को,
अन्यायी का दमन ही पोषण जीवन को,
हो संशयहीन अब तू संहार कर,
गांडीव उठा चुन चुन कर प्रहार कर,
चुन चुन कर प्रहार कर।