Tuesday, March 14, 2023

तेरी मर्जी

जो लैला भी तू

मजनूँ भी तू ही था

उनका मिलना बिछड़ना

बस तेरी ही रज़ा था

तो क्यों तूने लैला को दिया हुस्न

मजनूँ को नवाज़ा इश्क़ से

जब दोनों के मुकद्दर में

बिछड़ना ही लिखा था,

 

जो रंग भी तू

बहार भी तू ही था

तेरी मर्जी ही बाग का

सजना था

तो क्यों गुलों को नाज़ुकई

आंधियों को दी बेरुखी

जब दोनों को

एक दूजे से उलट चलना था,

 

जो जमीं भी तू

आसमां भी तू

तेरी चाह ही दोनों का

एक दूजे पर झुकना था

क्यों दी मज़बूरी तरसने की

क्यों रेख लगावट की दिलों में

जब दोनों को

क्षितिज पर भी न मिलना था.

 

14.03.2023

हम दोनों के दरमियां

बिखरा-बिखरा

अधूरा- अधूरा सा क्यों ये संसार

हम दोनों के दरमियां,

एक दिल एक जान थे कभी

क्यों बंटा ये ज़मी-आसमां

हम दोनों के दरमियां,

बसे थे जो नज़रों में कभी

क्यों धुंधले हुए ख्वाब

हम दोनों के दरमियां,

बाँधा जिस धागे ने टूटा वो ही

क्यों ये हालात

हम दोनों के दरमियां,

थामे जिनके हाथों ने हाथ कभी

फिर ये फासला क्यों

हम दोनों के दरमियां,

हाथ छूटे रिश्ते गए टूट के बिखर

क्यों ये मजबूरी

हम दोनों के दरमियां.

 

14.03.2023


Saturday, March 11, 2023

ओ महबूब ज़िन्दगी!

तू ऐसी रूठी

ओ महबूब ज़िन्दगी!

तुझे मनाना मुश्किल हो गया,

 

लम्हे में ऐसी बदली

ओ महबूब ज़िन्दगी!

तुझे जानना मुश्किल हो गया,

 

यूँ स्याह हुई तू

ओ महबूब ज़िन्दगी!

तुझे खोजना मुश्किल हो गया,

 

टूटी तो ऐसी बिखरी

ओ महबूब ज़िन्दगी!

तुझे जोड़ना मुश्किल हो गया,

 

हो कितनी भी बेरुख तू

ओ महबूब ज़िन्दगी!

तेरे बिना साँस लेना मुश्किल हो गया,

 

महबूब है तू मेरी

ओ ज़िन्दगी!

तुझे भूल जीना मुश्किल हो गया.

 

11.03.2023


काश!! एक पल को ख़ुदा हो जाती

काश!! एक पल को ख़ुदा हो जाती...

 

मेंरे हाथों में तेरी शिफ़ा हो जाती

गहरे ज़ख्म भर दे,वो दवा हो जाती

दर्द को हवा कर दे वो दुआ हो जाती

काश!! एक पल को खुदा हो जाती...

 

दिल के रिश्ते गहरे जो टूट गए कहीं

हाथ जो छूट गए कहीं

उसे मिलाने की चाह हो जाती

काश!! एक पल को ख़ुदा हो जाती...

 

जलाया जो ज़िन्दगी की धूप ने

तपते दिल को जो दे सुकून

वो ठंडा फाहा हो जाती

काश!! एक पल को खुदा हो जाती...

 

बरस कुछ यूं ज़मीं पर कि

तेरी रहमत के दरिया की

अंतहीन कथा हो जाती

काश!! एक पल को खुदा हो जाती...

 

11.03.2023


Wednesday, March 8, 2023

शुभ रंगोत्सव

मदमस्त बयार फागुन की

हवा में डोले प्यार फागुन की,

दिल डोले मस्ती में बोले

ये कैसी चाल फागुन की,

सुर्ख रंगों से उसके गालों

पर लिखे चाह फ़ागुन की,

पकड़ बहियां उसे कर दें

रंगों से सरोबार

याद रहे उसे हमेशा

इस मद मस्त फागुन की.

 

शुभ रंगोत्सव

08.03.2023