Wednesday, September 27, 2023

तुम्हें कैसे विदा दूँ प्रिय!

हलाहल के प्याले

टपकते नयनों से

हृदय में अंगार लिए

घेर खड़े विरह भेरी

तुम्हें कैसे विदा दूँ प्रिय!


अभी तो थम के

श्वांस ली थी तनिक

क्षितिज पर देख अरुणोदय

फूटी कलियां सुवासित मलय

तुम्हें कैसे विदा दूँ प्रिय!


शेष ही रहा

जो कहना था चाँदनी में तुझसे

अभी तो श्रृंगार

मिला नहीं दृष्टि से जी भर के

तुम्हें कैसे विदा दूँ प्रिय!


समर तुम्हें पुकारता

काँपता हृदय मेरा

अनजान भय से

पग की बेड़ी नहीं तुम्हारी

तुम्हें कैसे विदा दूँ प्रिय!

+

26.09.23

Thursday, September 14, 2023

युद्ध है तो युद्ध ही सही

 घिर जाए मन 

जो कभी दुविधा से

हो जाए उजाड़ 

दुनिया की भीड़ भाड़ से


पग हों छलनी

राह के शूलों से

दृष्टि होवे भ्रमित

गहरी धुंध से


श्वान भरते हों हुंकार

लड़ने को सिंह से

श्वास में घुले विष

मानो निकले भुजंग से


इस शोर में 

थमना, निर्विकार से

निकालना स्वयं को

दुविधा के ज्वार से


छूना क्षितिज को

गुज़र, राह के शूलों से

देखना इक किरण को

लड़ते हुए काली धुंध से


धैर्य से उठाना कदम

भिड़ जाना श्वानों के झुंड से

बांधना विष को कंठ पे

भुजंगधर,अभ्यंकर से


युद्ध है तो युद्ध ही सही

ये चुनौती है स्वीकार मुझे

भयभीत न होता क्षत्रिय

पिनाक की टंकार से


ठहरना ओ! वक़्त

लिखना है नाम अपना मुझे

इस अम्बर,धरा पर

तलवार की धार से


14.09.23

Friday, March 31, 2023

अब तो मुझे निर्वाणो राम

बन कर पाषाण शिला

युगों से करती प्रतीक्षा

अब तो चरण रज पसारो राम!!

 

मरु सी अगन से तपती

पल-पल जलती, घुटती, मिटती

अब तो मुझे सवारो राम!!

 

मृत हुए मेघ मन के

क्षिरती कण कण धूप वर्षा से

अब तो मुझे उबारो राम!!

 

अभिशप्त ही जीवन जिसका

उसे अभिशाप का भय कैसा

अब तो मुझे करुणा से निहारो राम!!

 

परित्यक्त यह जीवन

 जैसे नैया मांझी बिन

अब तो मुझे पुकारो राम!!

 

नियति ने किया पतित

जीवन हुआ कलंकित

अब तो अहिल्या को तारो राम!!

 

जीवन रूपी इस पिंजड़े में

होती विकल, पंखहीन खग जैसे

अब तो मुझे संभालो राम!!

 

पतित इस वनिता के

नयनों से बहते नीर को

अब तो अर्ध्य समझ स्वीकारो राम!!

 

न्याय की रक्षा का ऋण तुझपे

हर युग में छली गई अन्याय से,

अब तो ये ऋण उतारो राम!!

 

अपने भाग का विष पिया मैने

जो दिया तूने, वो जिया मैने

अब तो मुझे निर्वाणो राम!!

 

31.03.2023


Thursday, March 30, 2023

हे! अंतस के राम

हे! अंतस के राम

तुम जागो

भय आकुलता, व्याकुलता

पर तलवार भांजो,

महादानव के दमन को

यज्ञ साधो,

आहुति दो विजय हेतु

श्री प्राप्ति को महासमुद्र

पर महाप्रयत्नों का

पुल बांधो,

हे! अंतस के राम

तुम जागो,

जो बैठा व्याकुल

होकर भयभीत

पराजय से

विमुख हुआ कर्त्तव्य

पथ से,

धनुष की टंकार से

उसका आकुल हृदय साधो,

हे! अंतस के राम

तुम जागो,

खगोल, नक्षत्र समस्त

बंधे अपनी गति से

जन्म के साथ ही मानव

बंधा अपनी नियति से,

रणचंडी के आह्वान पर

जो पीठ दिखाते हैं

माँ के दूध को लज्जित करते

कापुरुष कहलाते हैं,

क्षत्रिय का धर्म ही

न्याय के लिए

रण में लौह टकराने का

दूध का ऋण, लहु से चुकाने का

हे! राम अपने जीवन का

लक्ष्य साधो,

नाराच के प्रहार से

पापियों को मर्यादा

में बांधो

हे! अंतस के राम...

 

30.03.2023


Wednesday, March 29, 2023

तेरी सांसों के दायरे में

गूंगी पीड़ाएँ बहा करती आंखों से

बांध खुद को मौन से,

चुपचाप रहा करती सांसों में

करती इंतज़ार लंबे

कोई तो झांके दिल में

कब तक मौन टकराये दीवारों से,

तेरी स्मित की चाह ने

तोड़े भय के बंधन सारे

बह उठी पीड़ा

तेरी बांहों के घेरे में,

खुद को सम्भालूँ कैसे

अब तू ही संभाल हमें

बाँधा खुद को

तेरी सांसों के दायरे में.

 

29.03.2023